✺ SANATAN GYAAN · पंचांग एवं व्रत

एकादशी कब है?
एकादशी कैलेंडर 2026

आज की और आने वाली एकादशी की तारीखें, व्रत के नियम, तिथि आरंभ–समाप्त और पारण की जानकारी — एक ही जगह।

📆 पूरे वर्ष की सूची📍 25 भारतीय शहर🪔 स्मार्त व वैष्णव

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समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं। यह गणना-आधारित संदर्भ है; विशेष व्रत, महाद्वादशी और पारण का अंतिम निर्णय स्थानीय मान्य पंचांग से करें।

अभी क्या आने वाला है?

अगली एकादशी

भगवान विष्णु को समर्पित पावन व्रत

पापांकुशा एकादशी

गुरु, 22 अक्टूबर 2026 · शुक्ल पक्ष

6दिन शेष
तिथि शुरू21 अक्टूबर 2026, 2:12 दोपहरतिथि समाप्त22 अक्टूबर 2026, 2:48 दोपहरव्रत पारण23 अक्टूबर 202606:26–08:42 बजे (IST, अनुमानित)
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तारीखों पर एक नज़र

अक्टूबर 2026 का कैलेंडर

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● रंगीन तारीख पर क्लिक करके एकादशी का विवरण देखें।

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2026 की एकादशी सूची

24 एकादशी
14जनवरी

षट्तिला एकादशी

बुध, 14 जनवरी 2026 · माघ · कृष्ण पक्ष

तिथि आरंभ13 जनवरी 2026, 3:18 दोपहर
तिथि समाप्त14 जनवरी 2026, 5:53 शाम
व्रत पारण15 जनवरी 202607:15–09:21 बजे (IST, अनुमानित)
षट्तिला एकादशी का महत्व

षट्तिला एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, नाम-जप, सात्त्विक आहार और अपनी क्षमता के अनुसार दान का महत्व बताया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं।

29जनवरी

जया एकादशी

गुरु, 29 जनवरी 2026 · माघ · शुक्ल पक्ष

तिथि आरंभ28 जनवरी 2026, 4:36 शाम
तिथि समाप्त29 जनवरी 2026, 1:55 दोपहर
व्रत पारण30 जनवरी 202607:10–09:20 बजे (IST, अनुमानित)
जया एकादशी का महत्व

जया एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, नाम-जप, सात्त्विक आहार और अपनी क्षमता के अनुसार दान का महत्व बताया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं।

13फ़रवरी

विजया एकादशी

शुक्र, 13 फ़रवरी 2026 · फाल्गुन · कृष्ण पक्ष

तिथि आरंभ12 फ़रवरी 2026, 12:22 दोपहर
तिथि समाप्त13 फ़रवरी 2026, 2:26 दोपहर
व्रत पारण14 फ़रवरी 202607:01–09:15 बजे (IST, अनुमानित)
विजया एकादशी का महत्व

विजया एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, नाम-जप, सात्त्विक आहार और अपनी क्षमता के अनुसार दान का महत्व बताया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं।

27फ़रवरी

आमलकी एकादशी

शुक्र, 27 फ़रवरी 2026 · फाल्गुन · शुक्ल पक्ष

तिथि आरंभ27 फ़रवरी 2026, 12:33 रात
तिथि समाप्त27 फ़रवरी 2026, 10:33 रात
व्रत पारण28 फ़रवरी 202606:49–09:07 बजे (IST, अनुमानित)
आमलकी एकादशी का महत्व

आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा और विष्णु भक्ति की परंपरा मिलती है।

15मार्च

पापमोचनी एकादशी

रवि, 15 मार्च 2026 · चैत्र · कृष्ण पक्ष

तिथि आरंभ14 मार्च 2026, 8:11 सुबह
तिथि समाप्त15 मार्च 2026, 9:17 सुबह
व्रत पारण16 मार्च 202606:31–08:55 बजे (IST, अनुमानित)
पापमोचनी एकादशी का महत्व

पापमोचनी एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, नाम-जप, सात्त्विक आहार और अपनी क्षमता के अनुसार दान का महत्व बताया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं।

29मार्च

कामदा एकादशी

रवि, 29 मार्च 2026 · चैत्र · शुक्ल पक्ष

तिथि आरंभ28 मार्च 2026, 8:46 सुबह
तिथि समाप्त29 मार्च 2026, 7:46 सुबह
व्रत पारण30 मार्च 2026विशेष पारण नियम लागू हो सकते हैं — स्थानीय पंचांग से सही मुहूर्त जाँचें।
कामदा एकादशी का महत्व

कामदा एकादशी चैत्र शुक्ल पक्ष में आती है और इसकी लोक-प्रचलित व्रत-कथा में ललित और ललिता का प्रसंग मिलता है।

13अप्रैल

वरूथिनी एकादशी

सोम, 13 अप्रैल 2026 · वैशाख · कृष्ण पक्ष

तिथि आरंभ13 अप्रैल 2026, 1:17 रात
तिथि समाप्त14 अप्रैल 2026, 1:09 रात
व्रत पारण14 अप्रैल 202607:07–08:31 बजे (IST, अनुमानित)
वरूथिनी एकादशी का महत्व

वरूथिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, नाम-जप, सात्त्विक आहार और अपनी क्षमता के अनुसार दान का महत्व बताया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं।

27अप्रैल

मोहिनी एकादशी

सोम, 27 अप्रैल 2026 · वैशाख · शुक्ल पक्ष

तिथि आरंभ26 अप्रैल 2026, 6:07 शाम
तिथि समाप्त27 अप्रैल 2026, 6:16 शाम
व्रत पारण28 अप्रैल 202605:44–08:22 बजे (IST, अनुमानित)
मोहिनी एकादशी का महत्व

मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, नाम-जप, सात्त्विक आहार और अपनी क्षमता के अनुसार दान का महत्व बताया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं।

13मई

अपरा एकादशी

बुध, 13 मई 2026 · ज्येष्ठ · कृष्ण पक्ष

तिथि आरंभ12 मई 2026, 2:52 दोपहर
तिथि समाप्त13 मई 2026, 1:30 दोपहर
व्रत पारण14 मई 202605:31–08:14 बजे (IST, अनुमानित)
अपरा एकादशी का महत्व

अपरा एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, नाम-जप, सात्त्विक आहार और अपनी क्षमता के अनुसार दान का महत्व बताया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं।

27मई

पद्मिनी एकादशी

बुध, 27 मई 2026 · अधिक ज्येष्ठ · शुक्ल पक्ष

तिथि आरंभ26 मई 2026, 5:11 सुबह
तिथि समाप्त27 मई 2026, 6:22 सुबह
व्रत पारण28 मई 2026विशेष पारण नियम लागू हो सकते हैं — स्थानीय पंचांग से सही मुहूर्त जाँचें।

उन्मीलिनी महाद्वादशी: स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें

पद्मिनी एकादशी का महत्व

पद्मिनी एकादशी अधिक मास के शुक्ल पक्ष में आती है और पुरुषोत्तम मास की भक्ति परंपरा से जुड़ी है।

11जून

परमा एकादशी

गुरु, 11 जून 2026 · अधिक ज्येष्ठ · कृष्ण पक्ष

तिथि आरंभ11 जून 2026, 12:58 रात
तिथि समाप्त11 जून 2026, 10:36 रात
व्रत पारण12 जून 202605:22–08:10 बजे (IST, अनुमानित)
परमा एकादशी का महत्व

परमा एकादशी अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आती है। इसमें विष्णु नाम-स्मरण, पूजा और दान की परंपरा है।

25जून

निर्जला एकादशी

गुरु, 25 जून 2026 · ज्येष्ठ · शुक्ल पक्ष

तिथि आरंभ24 जून 2026, 6:12 शाम
तिथि समाप्त25 जून 2026, 8:09 रात
व्रत पारण26 जून 202605:25–08:12 बजे (IST, अनुमानित)
निर्जला एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी कहा जाता है। निर्जल व्रत सभी के लिए उपयुक्त नहीं है; स्वास्थ्य के अनुसार निर्णय लें।

10जुलाई

योगिनी एकादशी

शुक्र, 10 जुलाई 2026 · आषाढ़ · कृष्ण पक्ष

स्मार्त: 10 जुलाई 2026 · वैष्णव: 11 जुलाई 2026
तिथि आरंभ10 जुलाई 2026, 8:16 सुबह
तिथि समाप्त11 जुलाई 2026, 5:23 सुबह
व्रत पारण11 जुलाई 2026विशेष पारण नियम लागू हो सकते हैं — स्थानीय पंचांग से सही मुहूर्त जाँचें।

क्षय एकादशी: सूर्योदय पर तिथि नहीं

योगिनी एकादशी का महत्व

योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, नाम-जप, सात्त्विक आहार और अपनी क्षमता के अनुसार दान का महत्व बताया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं।

25जुलाई

देवशयनी एकादशी

शनि, 25 जुलाई 2026 · आषाढ़ · शुक्ल पक्ष

तिथि आरंभ24 जुलाई 2026, 9:13 सुबह
तिथि समाप्त25 जुलाई 2026, 11:34 सुबह
व्रत पारण26 जुलाई 202605:39–08:22 बजे (IST, अनुमानित)
देवशयनी एकादशी का महत्व

देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की धार्मिक परंपरा शुरू मानी जाती है।

09अगस्त

कामिका एकादशी

रवि, 9 अगस्त 2026 · श्रावण · कृष्ण पक्ष

तिथि आरंभ8 अगस्त 2026, 1:59 दोपहर
तिथि समाप्त9 अगस्त 2026, 11:05 सुबह
व्रत पारण10 अगस्त 2026विशेष पारण नियम लागू हो सकते हैं — स्थानीय पंचांग से सही मुहूर्त जाँचें।
कामिका एकादशी का महत्व

कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, नाम-जप, सात्त्विक आहार और अपनी क्षमता के अनुसार दान का महत्व बताया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं।

23अगस्त

श्रावण पुत्रदा एकादशी

रवि, 23 अगस्त 2026 · श्रावण · शुक्ल पक्ष

तिथि आरंभ23 अगस्त 2026, 2:00 रात
तिथि समाप्त24 अगस्त 2026, 4:19 सुबह
व्रत पारण24 अगस्त 2026विशेष पारण नियम लागू हो सकते हैं — स्थानीय पंचांग से सही मुहूर्त जाँचें।
श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व

श्रावण पुत्रदा एकादशी श्रावण शुक्ल पक्ष का व्रत है, जिसे परिवार के कल्याण की प्रार्थना से जोड़ा जाता है।

07सितंबर

अजा एकादशी

सोम, 7 सितंबर 2026 · भाद्रपद · कृष्ण पक्ष

तिथि आरंभ6 सितंबर 2026, 7:29 शाम
तिथि समाप्त7 सितंबर 2026, 5:04 शाम
व्रत पारण8 सितंबर 202606:02–08:33 बजे (IST, अनुमानित)
अजा एकादशी का महत्व

अजा एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, नाम-जप, सात्त्विक आहार और अपनी क्षमता के अनुसार दान का महत्व बताया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं।

22सितंबर

परिवर्तिनी एकादशी

मंगल, 22 सितंबर 2026 · भाद्रपद · शुक्ल पक्ष

तिथि आरंभ21 सितंबर 2026, 8:01 रात
तिथि समाप्त22 सितंबर 2026, 9:43 रात
व्रत पारण23 सितंबर 202606:09–08:35 बजे (IST, अनुमानित)
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व

परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, नाम-जप, सात्त्विक आहार और अपनी क्षमता के अनुसार दान का महत्व बताया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं।

06अक्टूबर

इंदिरा एकादशी

मंगल, 6 अक्टूबर 2026 · आश्विन · कृष्ण पक्ष

तिथि आरंभ6 अक्टूबर 2026, 2:08 रात
तिथि समाप्त7 अक्टूबर 2026, 12:35 रात
व्रत पारण7 अक्टूबर 202606:16–08:37 बजे (IST, अनुमानित)
इंदिरा एकादशी का महत्व

इंदिरा एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, नाम-जप, सात्त्विक आहार और अपनी क्षमता के अनुसार दान का महत्व बताया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं।

22अक्टूबर

पापांकुशा एकादशी

गुरु, 22 अक्टूबर 2026 · आश्विन · शुक्ल पक्ष

तिथि आरंभ21 अक्टूबर 2026, 2:12 दोपहर
तिथि समाप्त22 अक्टूबर 2026, 2:48 दोपहर
व्रत पारण23 अक्टूबर 202606:26–08:42 बजे (IST, अनुमानित)
पापांकुशा एकादशी का महत्व

आश्विन शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा, जप और दान का विशेष महत्व माना जाता है।

05नवंबर

रमा एकादशी

गुरु, 5 नवंबर 2026 · कार्तिक · कृष्ण पक्ष

तिथि आरंभ4 नवंबर 2026, 11:03 सुबह
तिथि समाप्त5 नवंबर 2026, 10:36 सुबह
व्रत पारण6 नवंबर 202606:36–08:48 बजे (IST, अनुमानित)
रमा एकादशी का महत्व

कार्तिक कृष्ण पक्ष की रमा एकादशी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना से जुड़ी मानी जाती है।

20नवंबर

देवउठनी एकादशी

शुक्र, 20 नवंबर 2026 · कार्तिक · शुक्ल पक्ष

स्मार्त: 20 नवंबर 2026 · वैष्णव: 21 नवंबर 2026
तिथि आरंभ20 नवंबर 2026, 7:16 सुबह
तिथि समाप्त21 नवंबर 2026, 6:31 सुबह
व्रत पारण21 नवंबर 2026विशेष पारण नियम लागू हो सकते हैं — स्थानीय पंचांग से सही मुहूर्त जाँचें।

क्षय एकादशी: सूर्योदय पर तिथि नहीं

देवउठनी एकादशी का महत्व

देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागरण की परंपरा है। कई स्थानों पर तुलसी विवाह भी इसी अवधि में होता है।

04दिसंबर

उत्पन्ना एकादशी

शुक्र, 4 दिसंबर 2026 · मार्गशीर्ष · कृष्ण पक्ष

तिथि आरंभ3 दिसंबर 2026, 11:04 रात
तिथि समाप्त4 दिसंबर 2026, 11:45 रात
व्रत पारण5 दिसंबर 202606:59–09:04 बजे (IST, अनुमानित)
उत्पन्ना एकादशी का महत्व

उत्पन्ना एकादशी की परंपरागत व्रत-कथा में एकादशी देवी की उत्पत्ति का उल्लेख आता है।

20दिसंबर

मोक्षदा एकादशी

रवि, 20 दिसंबर 2026 · मार्गशीर्ष · शुक्ल पक्ष

तिथि आरंभ19 दिसंबर 2026, 10:09 रात
तिथि समाप्त20 दिसंबर 2026, 8:15 रात
व्रत पारण21 दिसंबर 202607:09–09:13 बजे (IST, अनुमानित)
मोक्षदा एकादशी का महत्व

मोक्षदा एकादशी को गीता जयंती से भी जोड़ा जाता है। इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता के पाठ की परंपरा है।

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पूजा, नियम और महत्व

एकादशी व्रत कैसे करें?

①

दशमी को तैयारी

दशमी की शाम सात्त्विक भोजन लें। अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और परिवार की परंपरा के अनुसार उपवास तय करें।

②

एकादशी को पूजन

प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु का ध्यान करें। दीप, पुष्प, तुलसीदल (परंपरा अनुसार), मंत्र-जप और धर्मग्रंथ पाठ कर सकते हैं।

③

व्रत में भोजन

कई परंपराओं में एकादशी पर अनाज से परहेज़ और फलाहार किया जाता है। निर्जल उपवास आवश्यक नहीं; स्वास्थ्य पहले रखें।

④

द्वादशी को पारण

अगले दिन सूर्योदय, हरिवासर और द्वादशी तिथि को ध्यान में रखकर पारण किया जाता है। समय स्थान एवं व्रत-परंपरा से बदल सकता है।

एकादशी व्रत कथा और धार्मिक महत्व

एकादशी हिंदू पंचांग की ग्यारहवीं तिथि है। सामान्यतः हर चंद्र मास में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में एक-एक एकादशी आती है। भगवान विष्णु की उपासना और आत्मसंयम से यह व्रत विशेष रूप से जुड़ा माना जाता है।

लोक-प्रचलित धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु के विश्राम के समय मुर नामक असुर का सामना करने वाली दिव्य शक्ति को 'एकादशी' कहा गया। विभिन्न एकादशियों की अलग-अलग पौराणिक व्रत कथाएँ भी प्रचलित हैं। उनके स्वरूप में क्षेत्र, ग्रंथ और परंपरा के अनुसार भिन्नता हो सकती है।

मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। आप इसे अपने दैनिक जप और प्रार्थना में शामिल कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकादशी से जुड़े सवाल

अगली एकादशी कब है?

ऊपर अगली एकादशी के कार्ड में चयनित शहर और स्मार्त/वैष्णव परंपरा के अनुसार आने वाले व्रत की तारीख दिखती है।

2026 में एकादशी कितनी बार आएगी?

आमतौर पर वर्ष में 24 एकादशियाँ आती हैं; अधिक मास होने पर 26 भी हो सकती हैं। वर्ष और नगर चुनकर उपलब्ध व्रत सूची देखें।

एकादशी की तिथि और व्रत की तारीख अलग क्यों होती है?

हिंदू पंचांग में तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से तय होती है; व्रत के लिए सूर्योदय और विशिष्ट धार्मिक नियम भी महत्त्वपूर्ण होते हैं।

स्मार्त और वैष्णव एकादशी में क्या अंतर है?

कभी-कभी संप्रदायगत नियमों, अरुणोदय या महाद्वादशी के कारण स्मार्त और वैष्णव व्रत अलग दिन मनाए जाते हैं।

एकादशी व्रत पारण कब करें?

सामान्यतः द्वादशी पर सूर्योदय के बाद, हरिवासर समाप्त होने पर और निर्धारित अवधि के भीतर पारण किया जाता है। कुछ दिनों में विशेष नियम लागू होते हैं।

क्या एकादशी पर चावल खाना चाहिए?

कई उपवास परंपराओं में चावल सहित अनाज का सेवन वर्जित माना जाता है। घर की परंपरा और स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतें ध्यान में रखें।

क्या यह कैलेंडर भारत के हर शहर के लिए है?

अभी 25 चुनिंदा भारतीय शहर उपलब्ध हैं और सभी समय भारतीय मानक समय में दिए जाते हैं। दूसरे स्थान के लिए स्थानीय पंचांग देखें।

क्या इस पेज को फ़ोन पर सेव कर सकते हैं?

हाँ। शेयर, कैलेंडर में सेव, बुकमार्क तथा होम स्क्रीन शॉर्टकट के विकल्प मौजूद हैं। होम स्क्रीन जोड़ने का तरीका आपके ब्राउज़र के अनुसार अलग हो सकता है।

© 2026 SanatanGyaan.com · भगवान विष्णु की भक्ति और हिंदू पंचांग की जानकारी

डेटा: 2025–2035 · चयनित भारतीय नगर · IST। खगोलीय गणना से तैयार संदर्भ; विशेष महाद्वादशी, संप्रदाय और पारण नियमों की स्थानीय पुष्टि आवश्यक है। वेबसाइट बिना बाहरी पंचांग API के काम करती है।

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