🪔 हिंदी आरती पाठ · दुर्गा
माँ दुर्गा की आरती – हिंदी में पाठ
माँ दुर्गा की आरती को मोबाइल पर स्पष्ट हिंदी अक्षरों में पढ़ें। पूजा करते समय बोल आसानी से देखने के लिए नीचे पूरा पाठ दिया गया है।
📖 डिजिटल पुस्तक में पढ़ें · बड़े अक्षर और ऑफलाइन सुविधा →कब पढ़ें?
इस आरती को इन अवसरों पर श्रद्धालु पढ़ते हैं: दैनिक पूजा · नवरात्रि · दुर्गा अष्टमी। परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा की विधि भिन्न हो सकती है।
माँ दुर्गा की आरती के बोल
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर नर मुनि जन सेवत, तिनके दुख हारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥शुम्भ निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥चौंसठ योगिन गावत, नृत्य करत भैरू।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
माँ दुर्गा की आरती ऑनलाइन या ऑफलाइन कैसे पढ़ें?
डिजिटल आरती पुस्तक खोलकर इस आरती को पसंदीदा सूची में जोड़ें। मोबाइल पर A+ से अक्षर बड़े कर सकते हैं। बिना इंटरनेट पढ़ने के लिए ऑनलाइन रहते हुए पूरी पुस्तक को सेव करें और सफल होने की पुष्टि देखें। ऑफलाइन डेटा इसी ब्राउज़र में रहता है और स्टोरेज साफ होने पर मिट सकता है।
अधिक जानकारी: इस आरती का महत्व और पूजा से जुड़ी जानकारी।
पाठ संदर्भ: आरती पाठ का संदर्भ देखें। परंपरागत पाठ में क्षेत्रीय अंतर संभव हैं।
